Agricultureनए दौर की खेती है किसानों का भविष्य | Modern Farming

नए दौर की खेती है किसानों का भविष्य | Modern Farming

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आज नए दौर की खेती/कृषि आधुनिक संशाधनों के कारण उन्नत होने के साथ प्राचीन तरीकों को पछाड़कर बहुत आगे निकल चुकी है। पिछले कुछ दशकों से हम देख रहे हैं कि आधुनिक खेती के तरीकों में नाटकीय रूप से बदलाव आता जा रहा है।

गेहूं, चावल, मकई, सोयाबीन और कई दलहन/तिलहन जैसी फसलों में हुए कई जेनेटिक्स संशोधन (Genetic modification) की शुरूआत ने भूमि आभाव की समस्या से निजात तथा अधिक मात्रा में भोजन/फसलों को उगाना संभव बना दिया है।

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जहाँ एक हमने फसल उत्पादन की मात्रा में वृद्धि दर्ज की है वहीँ दूसरी तरफ फसल के भंडारण, संरक्षण आदि के लिए परिवहन और संग्रहण के नए तरीके भी विकसित किए हैं, जिससे भविष्य में कभी भी अकाल अथवा भुखमरी जैसी विपदा का सामना न करना पड़े।

नए दौर की खेती में कई तरह के उन्नत तकनीकी और फसल प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग किया जाता है ताकि खेती का उत्पादन बढ़ाया जा सके। नए दौर की खेती के क्षेत्रों को अपनाने के लिए इस पोस्ट के माध्यम से विस्तृत चर्चा की गई है-

नए दौर की खेती की मूल बातें-

हम सभी जानते हैं कि खेती परंपरागत रूप से एक घरेलू व्यवसाय है, जो सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है. प्राचीन समय से ही परिवार का प्रत्येक सदस्य द्वारा अपने खेतों पर काम किया जाता रहा है। लेकिन 20वीं शताब्दी में, ज्यों-ज्यों पारिवारिक सदस्यों में कमी (नौकरी अथवा व्यवसाय के लिए घर से पलायन) होती गई, त्यों-त्यों पारंपरिक खेत बड़े-बड़े फार्मों में बदलते चले गए।

यह चलन आज भी जारी है, जहां पहले से कहीं कम लोग खेतों पर काम कर रहे हैं। बहुत से लोग खेती के बजाय शहरों में नौकरी आदि का काम करना पसंद कर रहे हैं, जिसका अर्थ है कि अधिकांश कृषि भूमि का प्रबंधन पहले की तुलना में कम लोगों द्वारा किया जाता है।

ऐसे में नए दौर की खेती खाद्य उत्पादन को देखने का एक नया तरीका है। इसमें फसलों को उगाने, पशुधन की संख्या बढ़ाने के लिए इच्छुक किसान/उद्यमी द्वारा उपयोग में ली जाने वाली विधियों में सुधार करने के लिए प्रौद्योगिकी और विज्ञान का उपयोग करना शामिल है।

आधुनिक प्रौद्योगिकी (modern technology) में तेजी से हुई प्रगति ने हमारे किसान भाइयों के लिए आय के कई दरवाजे खोल दिए हैं। आधुनिक तकनीक ने पारम्परिक तरीके से हटकर नए तरीके से उन्नत फसलें उगाने के साथ अपने पशुओं व मवेशियों का अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना आसान बना दिया है.

नए दौर की खेती के लाभ-

नए दौर की खेती के कई लाभ मिलते हैं, जो न केवल किसानों के लिए बल्कि समाज के लिए समृद्धि और हमारे विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं-

  1. उत्पादन क्षमता में वृद्धि– नई तकनीकों की प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग करके, फसल की उत्पादन क्षमता में वृद्धि स्वत: हो जाती है। स्मार्ट खेती और उच्च तकनीकी खेती के उपयोग से फसलों का उत्पादन बढ़ता है।
  2. जोखिम की भरपूर सुरक्षा– नई तकनीकें किसानों को जोखिम मुक्त और दृणता से उत्पादन बढ़ाने का आत्मविश्वास प्रदान करती हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बन सके।
  3. प्राकृतिक संसाधनों का सुविधाजनक उपयोग– नई तकनीकों का उपयोग करके प्राकृतिक संसाधनों का सटीक और सावधानीपूर्वक उपयोग किया जा सकता है। इससे जल संबंधित समस्याएं कम होती हैं और ऊर्जा स्रोतों का सुविधाजनक उपयोग किया जा सकता है।
  4. पर्यावरण संरक्षण: नई तकनीकों का उपयोग करके, खेती में प्रदूषण को कम किया जा सकता है, और इससे पर्यावरण संरक्षण में सहायता भी मिलती है।
  5. आजीविका सुरक्षा और ग्रामीण विकास– नए दौर की खेती के लिए आधुनिक प्रणालियां किसानों को आजीविका सुरक्षा में मदद करती हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा मिलता है जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती भी प्रदान करता है.
  6. बेहतर उपज- बेहतर उपकरण और प्रौद्योगिकी के कारण किसान अब अपनी भूमि पर पहले से कहीं अधिक फसलें उगा सकते हैं। मतलब कम प्रयास और कम संसाधनों से अधिक भोजन/फसल का उत्पादन करने में सक्षम हैं।
  7. बेहतर गुणवत्ता- बेहतर तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाली उपज आती है, जिसका अर्थ है कि उपभोक्ताओं को किराने की दुकान या किसान बाजार में बेहतर स्वाद वाले फल, सब्जियां, अनाज और अन्य खाद्य पदार्थ मिलेंगे।

नए दौर की आधुनिक खेती कम रसायनों का उपयोग करने तथा उच्च स्तर की फसल उत्पादन करने में सक्षमता प्रदान करती है, जो हर लिहाज से दुनिया के हर एक किसान के लिए किसी वरदान से कम नहीं. इसके अलावा नए दौर की खेती को सीमित भूमि, स्थान व कृत्रिम तापमान में (बायोनेट अथवा लैब) भी आसानी से किया जा सकता है.

जलवायु परिवर्तन को अनुकूल बनाना-

जलवायु परिवर्तन (Climate change) के अलावा ग्लोबल वार्मिंग व अन्य प्राकृतिक घटनाएँ आज लगभग हर किसान के लिए एक प्रमुख मुद्दा और चिंता का विषय बना रहता है. मौसम की चरम घटनाओं से निजात पाने के लिए दुनिया का प्रत्येक किसान पारंपरिक कृषि में आवश्यक फेरबदल कर नए दौर की खेती अपनाने के अवसर को तवज्जो दे रहा है।

आधुनिक खेती या नए दौर की खेती में फसल के मुताबिक कृत्रिम तरीके से जलवायु को अनुकूल बनाना बहुत ही आसान है. भारत के कई किसान जो नए दौर की खेती जैसे- एक्वापोनिक, एरोपोनिक, एक्वा-कल्चर, मधुमक्खी पालन, केकड़ा पालन, मछली पालन, मशरूम की खेती, कीड़ा जड़ी मशरूम की खेती आदि कर रहे हैं, प्रथम चरण में जलवायु को ही फसल के अनुकूल करते हैं.

नए दौर की खेती में उत्पादन करने के लिए फसल के अनुरूप जलवायु को बायोनेट अथवा लैब आदि के माध्यम से किया जाता है.

दक्षता प्रमाणीकरण
घटकनए दौर की खेतीपारंपरिक खेती
बेहतर तकनीकअधिक उत्पादन और कम शारीरिक श्रमसामान्य उत्पादन एवं अधिक श्रम
नई सामग्रीमशीनरी का उपयोगपारम्परिक कृषि उपकरण
नए तरीकेसीमित भूमि पर भी संभव 
वेस्ट का व्यवस्थितिकरणकम वेस्ट का उत्पादनअपशिष्ट उत्पादन प्रचुर मात्रा में
फसल की गुणवत्ताप्रभावीप्रभावी
फसल का उत्पादनपैदावार में वृद्धिसामान्य स्तर
पशुधन/मवेशीप्रभावीसामान्य

भंडारण के बेहतर विकल्प-

नए दौर की खेती में किसान अपनी उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखकर उसे बाजार में सही समय पर बिक्री कर सकते हैं. आधुनिक भंडारण प्रणाली नए दौर का एक सही और सुरक्षित और महत्वपूर्ण विकल्प है.

नए दौर में भण्डारण के कई तरीके हैं, मसलन-

  • परंपरागत गोदाम और सील पैकेजिंग: परंपरागत गोदामों का उपयोग करने और उत्पादों को सील पैकेजिंग करने से उन्हें माइक्रोबियल और कीटाणुक से बचाया जा सकता है। इससे उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहती है और उन्हें बचाने में मदद मिलती है।
  • कृषि उत्पादों के स्थानीय भंडारण केंद्र: स्थानीय भंडारण केंद्रों का उपयोग करके किसान अपने उत्पादों को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रख सकता है और उन्हें बाजार में पहुँचाने में कमी हो सकती है।
  • सौर और बिजली संचारित भंडारण: बिजली संचारित भंडारण प्रणालियों का उपयोग करके, सौर ऊर्जा और बिजली की सामरिक बचत से उत्पादों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • कोल्ड स्टोरेज तकनीक: कोल्ड स्टोरेज तकनीकों का उपयोग करके किसान फल, सब्जियां आदि कई अन्य उत्पादों को ठंडे स्थानों में सुरक्षित रख सकते हैं, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहती है।
  • मोबाइल भंडारण सुविधाएं: इसमें वाणिज्यिक वाहनों (vehicles) का उपयोग करके मोबाइल भंडारण सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं, जो किसान को बाजार जाने के लिए और उत्पादों को विभिन्न स्थानों में पहुँचाने के लिए सहायक हो सकती हैं।
  • किसान सहायता केंद्र या सहयोगी भंडारण साधन: किसान, सहायता केंद्र या सहयोगी भंडारण साधन बनाने में सहायता कर सकते हैं जो उन्हें उत्पादों/फसलों को सुरक्षित रखने में मदद करता है, जिससे अनुकूल समय पर उन्हें बाजार में अच्छी कीमत मिल सकती है।

नए दौर की खेती में ये भंडारण विकल्प किसानों को उत्पादों/फसलों को सुरक्षित रखने और उन्हें सही समय पर बाजार में प्रस्तुत करने में मदद मिलती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

नए दौर की खेती: हाइड्रोपोनिक प्रणाली-

हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली, खनिज व पोषक तत्वों के घोल का उपयोग करके मिट्टी के बिना पौधों को उगाने की एक विधि है। पोषक तत्वों की आपूर्ति पौधों की जड़ों को तरल रूप (पानी के घोल) से की जाती है, हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली ऑटोमेटिक सिस्टम या मैन्युअल दोनों रूप से काम करता है.

हाइड्रोपोनिक्स सिस्टम का मुख्य लाभ यह है कि यह आपको किसी भी फसल को किसी भी मौसम/जलवायु में पौधे/फसल उगाने की अनुमति देता है, यह प्रणाली उन क्षेत्रों में सबसे कारगर है, जहां मिट्टी/भूमि की स्थिति खराब है। इस प्रणाली से आप कम जगह में अच्छी फसल का उत्पादन भी कर सकते हैं।

हाइड्रोपोनिक सिस्टम को सेटअप करना बहुत ही सरल प्रक्रिया है, साथ ही विभिन्न तत्वों के घोल को निरंतर तथा नियंत्रित प्रवाहित करने के लिए पंप और टाइमर का उपयोग आदि का प्रयोग किया जाता है।

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से क्या-क्या उगाया जा सकता है?

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का उपयोग करके कई प्रकार के पौधे और फसलें उगाई जा सकती हैं। यहां कुछ प्रकार की पौधे और फसलों की सूची का उल्लेख किया जा रहा है, जो हाइड्रोपोनिक्स में उगाई जा सकती हैं-

1. सलाद पत्तियां (Lettuce) वाली सब्जियां
2. अनेक सब्जियां (Vegetables) जैसे- स्पिनेच, मेथी, गाजर, टमाटर, शिमला मिर्च, बैगन, और भिंडी आदि
3. फल पौधे (Fruits plants) जैसे स्ट्रॉबेरी और टमाटर
4. तुलसी, मिंट, धनिया, पार्सली, रोजमैरी, अलोवेरा और सतावरी जैसी जड़ी-बूटियां (Herbs)
5. मूंग दाल और उड़द दाल जैसी बीन्स (Beans Vegetables)
6. लगभग सभी प्रकार के फूलों के पौधे (Flowers plants)

मल्टी-लेयर फार्मिंग-

मल्टी-लेयर फार्मिंग नए दौर की खेती का एक सटीक परिचायक है, इसके तहत विभिन्न खेती संबंधित प्रणालियों को एक ही स्थान (सीमित अथवा विस्तृत) पर एकत्र कर कृषि की जाती है। इसे कई प्रकार की खेती में अपनाया जा सकता है, जैसे कि आधुनिक खेती, ओर्गेनिक खेती, और हाइड्रोपोनिक्स आदि। मल्टी-लेयर फार्मिंग के आधुनिक परिवेश हो सकते हैं-

  1. आधुनिक खेती: मल्टी-लेयर फार्मिंग में आधुनिक खेती तकनीकें जैसे कि स्मार्ट सेंसिंग, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT), और रोबोटिक्स का उपयोग हो सकता है। इससे उत्पादन में वृद्धि होती है और संरक्षित पर्यावरण में खेती की जा सकती है.
  2. हाइड्रोपोनिक्स: हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में जल का प्रबंधन किया जाता है और पौधों को मिश्रित पोषण समाधान में रखा जाता है, जिससे समृद्धि और उत्पादक्षमता में वृद्धि होती है।
  3. आधुनिक बीज तकनीक: मल्टी-लेयर फार्मिंग में आधुनिक बीज तकनीक का उपयोग किया जा सकता है ताकि उच्च उत्पादक्षमता और उत्तम गुणवत्ता वाली फसलें मिल सकें।
  4. बायो-फ्लोगिंग: बायो-फ्लोगिंग तकनीक का उपयोग करके उत्पादों को प्राकृतिक तरीके से उत्पन्न किए जा सकता है और खेती को सस्ता और आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयार कर सकता है।
  5. विचारशील बागवानी: मल्टी-लेयर फार्मिंग में विचारशील बागवानी प्रणालियों का उपयोग करके उत्पादों को सुरक्षित रखा जा सकता है और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

मल्टी-लेयर फार्मिंग विभिन्न तकनीकों का संयोजन करती है ताकि खेती को बेहतर और सुस्त बनाए रखा जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च उत्पादक्षमता, सतत और सहारा के रूप में बना रहता है, जिससे किसानों को अधिक समृद्धि हो सकती है।

अंत में-

आशा है कि इस लेख ‘नए दौर की खेती है किसानों का भविष्य’ से आपको नए दौर की खेती से जुड़ी समस्त जानकारी जरूर मिली होगी, इसके अतिरिक्त यदि कुछ छूट गया हो या कुछ पूछना/कहना चाहते हों तो कृपया Comment Box में लिखें, साथ इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ share करना न भूलें। अब तक इतना ही….

शुभकामनाएं आपकी कामयाब खेती और सफल व्यापारिक भविष्य के लिए.

धन्यवाद!

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